वाणी प्रकाशन के गौरव-ग्रन्थों की परम्परा में एक नयी कड़ी
रामेश्वर टांटिया रचनावली (तीन खण्डों में)
सम्पादक : डॉ० अर्जुन तिवारी
___सम्पूर्ण सेट का मूल्य : 2685/- ___
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रामेश्वर टांटिया
रामेश्वर टांटिया का जन्म 26 जनवरी 1910 ई० को राजस्थान के सरदारशहर में हुआ। पंद्रह वर्ष की उम्र में ही वे रोजगार केलिए सरदारशहर से कलकत्ता आ गए। इसी दौरान अपने निजी व्यापर को बढ़ाया और अपने अध्यवसाय से बम्बई, असम और कलकत्ता में विभिन्न उद्योग स्थापित किये । चार वर्षों तक वे प्रसिद्ध समाजसेवी संस्था ‘मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी’ के सचिव रहे। कलकत्ते में हिन्दी भाषी बच्चों के लिए ‘टांटिया हाई स्कूल’ की स्थापना की और बाद में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। व्यवसाय, उद्योग, समाजसेवा और राजनीति के अलावा टांटिया जी लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे। सामाजिक-ऐतिहासिक बोध से संपन्न कहानियों के साथ साथ उन्होंने विचारपूर्ण लेख और आर्थिक समीक्षाएं भी लिखी हैं। श्री रामेश्वर टांटिया ने देश-विदेश की कई यात्राएं की हैं और अपने विशिष्ट यात्रा-संस्मरणों से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है। उनका निधन 22 जुलाई 1977 ई० को हुआ।
सम्पादक: डॉ० अर्जुन तिवारी
डॉ० अर्जुन तिवारी ने ‘हिन्दी पत्रकारिता का उद्भव और विकास’ पर शोधकार्य किया है और पत्रकारिता तथा साहित्य की पी. जी. कक्षाओं में 33 वर्षों तक अध्यापन किया है। पात्रकारिता और शब्दकोश से संबन्धित इनकी लगभग दो दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यों के लिए इन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान और पदक भी प्राप्त हो चुके हैं।
पुस्तक का लिंक नीचे दिया जा रहा है :
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